मजबूरी - डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव
आँखी में लोर काहे जी? हमार बाबा मर गइनी हम उहाँ के देखहूँ ना गइनी काहे? बॉस छुट्टी ना दिहलन तऽ का करब आज के नौकरी सब नाता-रिश्ता चबा के बइठ ...
आँखी में लोर काहे जी? हमार बाबा मर गइनी हम उहाँ के देखहूँ ना गइनी काहे? बॉस छुट्टी ना दिहलन तऽ का करब आज के नौकरी सब नाता-रिश्ता चबा के बइठ ...
आई गइले जेठ के महिनवाँ ए, भइया, लुहिया तऽ अब चलेले झकमोर॥ तपत बांटैं सुरज, नाचति बाय दुपहरिया अगिया डड़ावै चलि-चलि पछुआ-बयरिया उसरन में बाढ़...
प्रथम पिता परमेसर का ध्यान धरि लिखतानी सुनु चित लाय मेलाघुमना। आवेला सिराती मेला, बदरी, मकर आदि करे लागे आगे से तेयारी मेलाघुमना॥ मेलवा में ...
कहीं का, करीं का, चली कौन राहे अजीबे दशा बा भइल आदमी के। पराया के आशा कइल छोड़, खुद पर उचित बा भरोसा कइल आदमी के। जरल जे बना के स्वयं प्राण-...
राउर मुस्की के चुस्की पर हम तऽ लुटा गइनी मन भइल, तनी भर गाल बतियइती हमरा बात पर रउआ अइसन हँसनी भहरा गइल भीतर के दांत जमीन पर अइसन छितराइल मो...
सूतल रहती हम सैंया सुख-सेजिया से, सपना देखलि अजगुत रे नयकवा । जब-जब मन परे नैना से नीर ढरे, धर-थर कॉंपेला करेज रे नयकवा। बेटी अनबोलता के मँग...
नदिया किनार एक ठे चिता घुंघुआले, लुतिया उड़ि-उड़ि गगनवा में जाय। लहकि-लहकि चिता लकड़ी जलावै, धधकि-धधकि नदी के सनवा दिखाये। आइ के बतास अगियन ...
अब हम चरखा चलइबै अरे सावनवां॥ मनवां बोवइबै, रूई उपजइबै, धुनियां से रुइया धुनइबै॥ अरे। बढ़ई बोलाइ चरखा बनवइबै, दिन रात सुतवा कतइबै॥ अरे। खट्ट...
भूप द्वारा बाज़त बधाई रे, हाँ रे बधाई रे, भये चार ललनवाँ॥ राजाजी लुटावे हाँ अन धन सोनवाँ, हाँ अन धन सोनवाँ, कोसिला लूटावे घेनु गाई॥ भये चार ...
अइले बसन्त महँकी फइललि बाय दिगन्त, भइया धीरे-धीरे बहेली बयारि। फूलैलें गुलाब, फुलै उजरी बेइलिया, अमवाँ के डरियन पर बोलैली कोइलिया। बोलैले पप...
धरती अकास आजु मिले गरवा डार कतहीं मिले ना सँवरिया हमार, सखिया! थाके रहिया निहार दूनो अँखिया उघार नाही आवे निरमोहिया हो मोरे रखवार उठे जीयरा ...
फूल खिले लागल, सुख मिले लागल, अब बुझाता बसन्त मधुमास आ गइल। कहीं कलि पर अलि बिहार करता, कोइलरियो के दिल में हुलास आ गइल। फूल खिले लागल ……….॥...
जवानी जोश के आगार होला लबालब प्रेम-पारावार होला। डगर में पाँव थम-थम के उठाईं अनेसा बहके के हर बार होला। धरेला ठीक से पतवार सेही मजे में पार ...
अपुसे के रार में हेराइ गइल बखरा, टुकी- टुकी घरवार हाय रे बखरा। देसा-देसी घूमि सब शहरे पराइल गाँव के पिरितिया दुकहवाँ हेराइल गाँव ना भइल भइल ...
कवने सुगना पे गोरी तू लुभा गइलू हो। कवने सुगना पे… उड़ि-उड़ि ऊँचे अकसवा में बोले, पंख पसारे पवन संग डोले, अइसना से नेहिया लगा गइल हो। कवने स...
सरगम-सरगम गूँजे गीत के लहरिया, पोर-पोर बाजि उठे, प्रीत के बंसुरिया। लय पऽ लय बांधि गइल छंद-छंद ढल के, ताल-ताल पऽ लहरे, कंठ से निकल के, जिनिग...
अब ना सहात बा, कोइलिया के बोलिया बोले बसवरिया पर भोर के पहरिया तऽ लागे जइसे गोलिया। अब ना सहात बा……….॥ सेजिया पर लोटेली काली रे नगीनिया, रोज...
कहिया ले अइबऽ मोरे पिया परदेसिया पतिया पेठवत नइखऽ तुहि बाड़ जिनगी के संघतिया कहिया ले अइबऽ..... संघे रातदिन रहे के सपना सजवली तोहरे सुरतिया अ...
ए बेटा सुत जा बाबू, फिर उठिहऽ बिहान, देखिह आपन बाबूजी के, जोतत उनकर खलिहान, मामा के संग खेत घूमिहऽ, हम सबके माथा चुमिहऽ, तोहरे प्यार करे ला ...
गीत जिनिगी के छन-छन, निहार लिखली, जवन पवलीं अँजोर या, अन्हार लिखलीं। केतने गुजरल ना जाने तपन जेठ के, केतने सावन के रिम-झिम फुहार लिखलीं। जवन...